Sunday, 28 July 2024
Monday, 8 July 2024
Monday, 1 July 2024
Saturday, 1 June 2024
Friday, 10 May 2024
पितृअष्टक
*पितृअष्टक*
जयांच्या कृपेने या कुळी जन्म झाला
पुढे वारसा हा सदा वाढविला
अशा नम्र स्मरतो त्या पितरांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || १ ||
इथे मान सन्मान सारा मिळाला
पुढे मार्ग तो सदा दाखविला
कृपा हीच सारी केली तयांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || २ ||
मिळो सद् गती मज पितरांना
विनती हीच माझी त्रिदेवतांना
कृती कर्म माझ्या मिळो मोक्ष त्यांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ३ ||
जोडून कर हे विनती तयांना
अग्नि वरूण वायु आदी देवतांना
सदा साह्य देवोनी उध्दरी पितरांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ४ ||
वसुरूद्रदित्य स्वरूप पितरांना
सप्तगोत्रे एकोत्तरशतादी कुलांना
मुक्तीमार्ग द्यावा ऊध्दरून त्यांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ५ ||
करूनी सिध्दता भोजनाची तयांना
पक्वान्ने आवडीनें बनवून नाना
सदा तृप्ती होवो जोडी करांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ६ ||
मनोभावे पुजूनी तिला, यवाने
विप्रास देऊन दक्षिणा त्वरेने
आशिष द्याहो आम्हा सकलांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ७ ||
सदा स्मृती राहो आपुलीच आम्हा
न्यून काही राहाता माफी कराना
गोड मानुनी घ्यावे सेवा व्रतांना
नमस्कार साष्टांग त्या पूर्वजांना || ८ |।
पितृ पंधरवड्यात रोज पठण करावे ज्यांना रोज शक्य नाही त्यांनी निदान श्राद्धा चे दिवशी जरूर हे अष्टक म्हणावे.
*🌹🙏गुरुदेव दत्त 🙏🌹*
Thursday, 1 February 2024
श्री गुरुचरित्र रहस्य
Astrotech Lab में आपका स्वागत है, आज हम श्री गुरुचरित्र इस विषय पर आपके साथ जानकारी सांझा करते है.
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श्री गुरुचरित्र एक महाप्रत्ययकारी दत्तावतार के मूल अवतार और पिछले अवतार की जीवन कहानी है। परंतु यह जीवनी अन्य जीवनियों से बहुत भिन्न है और पिछले चार सौ वर्षों से दत्त भक्तों के हृदय में इसने शाश्वत स्थान बना रखा है। गुरुचरित्र की गणना ज्ञानेश्वर की भावार्थदीपिका, तुकाराम की गाथा, एकनाथ की भागवत, रामदास की दासबोध आदि दिव्य ग्रंथों में की जाती है। ये सभी पुस्तकें काव्य, ज्ञान, प्रेम, भक्ति आदि गुणों पर आधारित हैं। उपर्युक्त प्रासादिक ग्रंथों की श्रेणी में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त होने पर भी गुरुचरित्र ने अपनी अनूठी एवं विशिष्ट विशेषताएँ सुरक्षित रखी हैं। वह विशेषता है गुरुचरित्र की संक्षिप्त प्रस्तुति। एक और कारण यह है कि यह पुस्तक दार्शनिक प्रवचन की छोटी धाराओं वाली अन्य पुस्तकों से अलग है, क्योंकि इसमें आत्म चेतना, आत्मा की मृत्यु के बाद की स्थिति, पुनर्जन्म, कर्म सिद्धांत जैसे बौद्धिक विषयों को प्रस्तुत करते हुए मनोरंजन के लिए कोई व्यत्यय नहीं है। गुरुचरित्र का अन्य प्रसाद ग्रंथों से एक अंतर यह है कि यह संपूर्ण ग्रंथ एक सुसंगत मालामंत्र है। मंत्रों के दो मुख्य प्रकार हैं वरदमंत्र और शक्तिमंत्र। वरदमंत्र वह मंत्र है जिस पर देवता का आशीर्वाद होता है। वरदमंत्रों के बारे में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे मंत्र प्रबुद्ध व्यक्तियों, भगवान अवतारों और सिद्ध पुरुषों के मुख से निकले होते हैं। ऐसे में उन मंत्रों के इष्टदेव और मंत्र जपने वाले की तपस्या को इन मंत्रों में जोड़ दिया जाता है। इसलिए, ऐसे मंत्र भाषा शुद्धता, काव्य या किसी अन्य प्रकार के किसी भी नियम या आयाम के अधीन नहीं हैं। लेकिन ऐसे वरदान मंत्र को सिद्ध करने के लिए उस मंत्र के इष्टदेव की पूजा करनी पड़ती है और दुर्लभ मामलों में कठोर तपस्या भी करनी पड़ती है। वरदमंत्र की विशेष विशेषता यह है कि एक बार इस मंत्र को सिद्ध कर लेने पर यदि एक बार भी इसका जाप किया जाए तो मंत्र वांछित सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
शक्तिदमंत्रों का स्वरूप थोड़ा भिन्न है। शक्तिदमंत्र के अक्षर, शब्द या वाक्यांश इतने प्रभावशाली हैं कि इनका बार-बार पाठ करने से ही अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं। कालीसंतरानो उपनिषद (हरे राम हरे रामा), तेरह अक्षर वाला राम मंत्र (श्री राम जय राम), छह अक्षर वाला शिव मंत्र (ओम नमः शिवाय), पांच अक्षर वाला शिव मंत्र (नमः शिवाय), नवार्ण मंत्र (ओम ऐं ह्रीं) क्लिम), मृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे), गायत्री मंत्र (तत्सवितुः), सिद्धदत्तमंत्र (दिगम्बर दिगम्बर) आदि सभी मंत्र शक्तिशाली मंत्र हैं. इसके अतिरिक्त एकाक्षरी के बीज मंत्र जैसे ॐ, ऐं, हिम, क्लीं, श्रीं, आं, सौः आदि मंत्र) और मालामंत्र ऐसे दो प्रकार के होते हैं.
गुरुचरित्र मूलतः आशीर्वाद का ग्रंथ है। सरस्वती गंगाधर ने प्रमाणित किया है कि गुरु चरित्र पढ़ने वाले के मन में गुरु चरित्र बना रहता है। क्योंकि गुरुचरित्र पाठकों में श्रीगुरु के प्रति अभूतपूर्व श्रद्धा होती है.
पुस्तक पढ़ते समय उच्चारण में कुछ गलतियाँ या अन्य त्रुटियाँ होने पर भी मौली के रूप में श्रीगुरु उन गलतियों को माफ करते है। अत: यह एक अनुभवजन्य तथ्य है कि गुरुचरित्र ग्रंथ का पाठ विभिन्न अध्यायों की किसी भी आधी-अधूरी पोथी में से भी किया जाए तो उसका फल अवश्य मिलता है।
यदि यही बात है, तो गुरुचरीत्रपर शोध करने में अपना जीवन व्यतीत क्यों कीया जाता है? इसका उद्द्येश यह है की गुरु चरित्र को शक्ति ग्रंथ में बदला जा सकता है। और तंत्र का एकमात्र उद्देश्य वरदमंत्र को शक्तिमंत्र में परिवर्तित करना है। काव्य में गुरुचरित्र का बार-बार पाठ वरदमंत्रों को साधारण शक्तिमंत्रों में बदल देता है। सामान्यतः वरदमंत्र, शक्तिमंत्र, बीज मंत्र, माला मंत्र या किसी भी प्रकार का मंत्र हो, बार-बार मंत्र का जाप करने से उस मंत्र के अक्षरों की कंपन और शक्ति बढ़ जाती है। गुरुचरित्र प्रवाह सिद्धवरदमालामंत्र के उपरोक्त रूपों में से एक है। अक्षरों की भाषा, व्याकरण, शब्दों की संख्या आदि जैसे तकनीकी पहलुओं को देखने के बजाय शब्दों को ध्यान से पढ़ना महत्वपूर्ण है। सिद्धमाला मंत्र का जप करते समय हृदय में दत्तगुरु का स्मरण तनिक भी हो तो भी यह तुरंत फलदायी होता है।
गुरुचरित्र दत्त सम्प्रदाय के अद्भुत रत्नों में से एक है। जिस प्रकार महाभारत ग्रंथों के रचयिता के संदर्भ में 'व्यासोचिष्ठ जगत् सर्वम्' कहावत का प्रयोग किया जाता है। इसि प्रकार
गुरुचरित्र में क्या है?' यह पूछने के बजाय, 'गुरुचरित्र में क्या नहीं है?' ऐसा प्रश्न अधिक उपयुक्त होगा. स्मृतिचंद्रिका जैसे नीतिशास्त्र पर आधारित अह्निका और आचार, विभिन्न उपनिषदों पर आधारित वैदिक दर्शन, व्रतराज आदि ग्रंथों पर आधारित व्रतवैकल्य, विभिन्न विषयों को चतुराई से प्रस्तुत करके धर्मपरायणता का आह्वान करने वाले गुरुचरित्र की तुलना में शायद ही कोई अन्य पुस्तक हो।
इन सभी विषयों को अध्यायवार व्यवस्थित करना और काव्य के छंदों से सजाना कोई सामान्य बात नहीं है। गुरुचरित्र जैसे अद्भुत ग्रंथ की रचना तभी हो सकती है जब बुद्धि का दिव्य उपहार और हृदय की भक्ति और श्रीगुरु का आशीर्वाद ये तीन चीजें एक साथ मिलें।
हम आशा करते है यह जानकारी आपको लाभदायक रहेगी.
शुभम भवतु....
Friday, 6 October 2023
कैसे पाएं शराब से छुटकारा ?
कैसे पायें शराब से छुटकारा?
शराब की लत से छुटकारा पाने के लिए सबसे जरूरी दृढ़ संकल्प है। जबतक आप इसे लेकर दृढ़ संकल्पित नहीं होंगे, आप शराब नहीं छोड़ सकते हैं। आपके दृढ़ संकल्प के बाद कुछ घरेलू उपाय हैं, जिनकी मदद से आप शराब छोड़ सकते हैं।
शराब से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय
तुलसी
तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। ये कई बीमारियों के इलाज में कारगर है। शराब के आदी हो चुके लोग तुलसी की कोमल पत्तियों को रोजाना सुबह-सुबह चबाएं। इससे शरीर और मन के अंदर की गंदगी साफ होंगी, जिससे आप धीरे-धीरे शराब दूर होने लगेंगे।
करेला:
करेले को भी कई बीमारियों के इलाज में रामबाण माना गया है। शराब की लत को छुड़ाने के लिए करेले के पत्तों का रस निकाल कर, दो चम्मच छाछ में मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पिने से शराब छोड़ने में मदद मिलती है। करेले का जूस शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है, जिससे शराब पीने की इच्छा कम होने लगती है।
शहद और अदरक
शहद और अदरक को भी शराब की लत छुड़ाने में कारगर माना गया है। इसके लिए सबसे पहले अदरक का रस निकाल कर रखे लें, अब जब भी शराब पीने की इच्छा करे, एक चम्मच शहद में अदरक की 2 से 3 बूंदें मिलाकर सेवन करें। इससे शराब पीने की इच्छा तुरंत मर जायेगी। धीरे-धीरे ये उपाय शराबी को शराब से दूर कर देता है।
अजवाइन
अजवाइन भी शराब छुड़ाने के लिए कारगर उपायों में से एक है। इस उपाय को करने से पहले 150 ग्राम अजवाइन को दो लीटर पानी में अच्छे से उबाल लें। इस तब तक उबालें, जब तक पानी की मात्रा आधी ना रह जाये। इसके बाद पानी को ठंडा होने पर छानकर रस को कांच की बोतल में रख लें। इसके बाद प्रतिदिन इस रस को दिन में दो बार आधा-आधा गिलास पानी को पिएं।
ये तो कुछ घरेलू उपाय हैं, जिन्हें कर आप आसानी से शराब छोड़ सकते हैं, लेकिन आपको पहले भी बता चुके हैं कि जब तक आप खुद शराब नहीं छोड़ना चाहेंगे, आप शराब नहीं छोड़ सकते हैं। हां, अगर आपने शराब छोड़ने के लिए दृढ़ संकल्प ले लिया है तो आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, जैसे- खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें, एकांत में बिल्कुल न रहें, ज्यादा से ज्यादा परिवार के साथ समय बिताएं। ये छोटी-छोटी चीजें आपको शराब छोड़ने में मदद करेगी।
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