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Monday, 6 July 2020
Sunday, 20 October 2019
दीपावली शुभ मुहूर्त - By Astrologer Dr.Suhas Rokde
|| ओम श्रीम लक्ष्मीनारायणाय नम: || ओम श्रीम कुबेराय नम: ||
श्री महालक्ष्मी ज्योतिष व अस्ट्रोटेक लॅब तर्फे दिवाळीच्या आभारभर शुभेच्छा !
आपल्या जीवनात लक्ष्मीनारायण, कुबेर यांची कृपा सदैव राहो हीच श्री चरणी आमची प्रार्थना |
शुभ मुहूर्त काळ
मंगळवार दि. 22 ऑक्टोबर रोजी सूर्योदयापासून दु. 4.37 प. पुष्य नक्षत्रकाळात व्यापारी वह्या आणाव्यात. त्यादिवशी स. 11.00 ते दु. 1.45 प. लाभ व अमृत चौघडी आहेत. तसेच दु. 3.20 ते 4.40 शुभ मुहूर्त असून या वेळेत वह्या आणाव्यात.
शुक्रवार दि.25-10-2019 रोजी धन्वंतरी पूजन मुहूर्त
स.8.15 ते 10.45, लाभ-अमृत दु. 12.30 ते 1.00 शुभ या दोन्ही काळात शुभ मुहूर्त असून या शुभ वेळेत वह्या आणाव्यात. तसेच साय. 7 नंतर धन्वंतरी पूजन करावे.
रविवार दि. 27-10-2019 - लक्ष्मी-कुबेर पूजन मुहूर्त
साय.6 ते 8.30 पर्यन्त तसेच 9.10 पर्यन्त शुभ व अमृत योग आहे. या शुभ वेळेत लक्ष्मी पूजनसोबत वहीपूजन करावे.
बलिप्रतिपदेचे वहीपूजन मुहूर्त
सोमवार दि.28-10-2019 रोजी पहाटे 5.10 ते सकाळी 8.00, सकाळी 9.45 ते 10.45 व दु. 3.15 ते साय.6.00 या शुभ वेळेत वहीपूजन करावे.
भाऊ बीज मुहूर्त
साय. यमद्वितीया, यमपूजन, यमतर्पन करून भाऊ बीज साजरी करावी.
संकल्प 25-10-2019 मुहूर्त साय. 7.15 नंतर धन्वंतरी पूजन
ॐ विष्णु विष्णु विष्णु श्रीमद् भगवतो महापुरुषोस्य ब्राम्हणोही द्वितीय पराध्वे श्वेत वराह कल्पे जंम्बुद्विपे भारतखंडे नागपुर नगरे स्वगृहे विकारी नामसंत्सरे, दक्षिणायने, कृष्ण पक्षे , अश्विन मासे ,हेमंत ऋते,भृगु वासरे , द्वादशी तिथे , उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र , एंद्र योगे , गरज करणे, षष्टम चंद्रे, वर्तमान स्थिते रवि स्वाति-तुला , दे.बृ जेष्ठा-वृश्चिक, दै.शु विशाखा-तुला, शनिदेव पुषा-धनु ........गोत्रोपन्न यजमान....
संकल्प 27-10-2019 मुहूर्त साय. 6 ते 8.30 पर्यन्त लक्ष्मी पूजन
ॐ विष्णु विष्णु विष्णु श्रीमद् भगवतो महापुरुषोस्य ब्राम्हणोही द्वितीय पराध्वे श्वेत वराह कल्पे जंम्बुद्विपे भारतखंडे नागपुर नगरे स्वगृहे विकारी नामसंत्सरे, दक्षिणायने, कृष्ण पक्षे , अश्विन मासे ,हेमंत ऋते,भानू वासरे , अमावास्या तिथे , चित्रा नक्षत्र , विशकुंभ योगे , नाग करणे, सप्तम चंद्रे, वर्तमान स्थिते रवि स्वाति-तुला , दे.बृ जेष्ठा-वृश्चिक, दै.शु विशाखा-तुला, शनिदेव पुषा-धनु ........गोत्रोपन्न यजमान....
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शुभ मुहूर्त काळ
मंगळवार दि. 22 ऑक्टोबर रोजी सूर्योदयापासून दु. 4.37 प. पुष्य नक्षत्रकाळात व्यापारी वह्या आणाव्यात. त्यादिवशी स. 11.00 ते दु. 1.45 प. लाभ व अमृत चौघडी आहेत. तसेच दु. 3.20 ते 4.40 शुभ मुहूर्त असून या वेळेत वह्या आणाव्यात.
शुक्रवार दि.25-10-2019 रोजी धन्वंतरी पूजन मुहूर्त
स.8.15 ते 10.45, लाभ-अमृत दु. 12.30 ते 1.00 शुभ या दोन्ही काळात शुभ मुहूर्त असून या शुभ वेळेत वह्या आणाव्यात. तसेच साय. 7 नंतर धन्वंतरी पूजन करावे.
रविवार दि. 27-10-2019 - लक्ष्मी-कुबेर पूजन मुहूर्त
साय.6 ते 8.30 पर्यन्त तसेच 9.10 पर्यन्त शुभ व अमृत योग आहे. या शुभ वेळेत लक्ष्मी पूजनसोबत वहीपूजन करावे.
बलिप्रतिपदेचे वहीपूजन मुहूर्त
सोमवार दि.28-10-2019 रोजी पहाटे 5.10 ते सकाळी 8.00, सकाळी 9.45 ते 10.45 व दु. 3.15 ते साय.6.00 या शुभ वेळेत वहीपूजन करावे.
भाऊ बीज मुहूर्त
साय. यमद्वितीया, यमपूजन, यमतर्पन करून भाऊ बीज साजरी करावी.
संकल्प 25-10-2019 मुहूर्त साय. 7.15 नंतर धन्वंतरी पूजन
ॐ विष्णु विष्णु विष्णु श्रीमद् भगवतो महापुरुषोस्य ब्राम्हणोही द्वितीय पराध्वे श्वेत वराह कल्पे जंम्बुद्विपे भारतखंडे नागपुर नगरे स्वगृहे विकारी नामसंत्सरे, दक्षिणायने, कृष्ण पक्षे , अश्विन मासे ,हेमंत ऋते,भृगु वासरे , द्वादशी तिथे , उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र , एंद्र योगे , गरज करणे, षष्टम चंद्रे, वर्तमान स्थिते रवि स्वाति-तुला , दे.बृ जेष्ठा-वृश्चिक, दै.शु विशाखा-तुला, शनिदेव पुषा-धनु ........गोत्रोपन्न यजमान....
संकल्प 27-10-2019 मुहूर्त साय. 6 ते 8.30 पर्यन्त लक्ष्मी पूजन
ॐ विष्णु विष्णु विष्णु श्रीमद् भगवतो महापुरुषोस्य ब्राम्हणोही द्वितीय पराध्वे श्वेत वराह कल्पे जंम्बुद्विपे भारतखंडे नागपुर नगरे स्वगृहे विकारी नामसंत्सरे, दक्षिणायने, कृष्ण पक्षे , अश्विन मासे ,हेमंत ऋते,भानू वासरे , अमावास्या तिथे , चित्रा नक्षत्र , विशकुंभ योगे , नाग करणे, सप्तम चंद्रे, वर्तमान स्थिते रवि स्वाति-तुला , दे.बृ जेष्ठा-वृश्चिक, दै.शु विशाखा-तुला, शनिदेव पुषा-धनु ........गोत्रोपन्न यजमान....
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Wednesday, 4 April 2018
क्यों हर मंत्र के आखिर में बोला जाता है स्वाहा ?
हवन या किसी भी
धार्मिक अनुष्ठान मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा कहकर ही हवन सामग्री भगवान को
अर्पित
करते है| स्वाहा का अर्थ है सही रीती से पहुचाना | दुसरे शब्दों में कहे तो जरुरी
भौगिक
पदार्थ को उसके प्रिय तक पहुचाना | दरअसल कोई भी यज्ञ तब तक सफल नहीं माना
जा सकता है
जब तक की हवन का ग्रहण देवता न कर ले| लेकिन देवता ऐसा ग्रहण तभी कर
सकते है , जबकि
अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से अर्पण किया जाए| स्वाहा की
उत्पत्ति से रोचक कहानी भी जुडी
हुई है | इसके अनुसार , स्वाहा प्रकुति की ही एक
कला थी , जिसका विवाह अग्नि के साथ
देवताओं के आग्रह पर संपन्न हुआ था | भगवान
श्रीकृष्ण ने स्वयं स्वाहा को ए वरदान दिया था की केवल उसी के माध्यम से देवता हवन
में अर्पित की जाने वाली सामग्री को ग्रहण कर पाएंगे |
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Monday, 19 February 2018
होलिका की लपट देती संकेत-ज्योतिष्याचार्य डॉ.सुहास
होलिका की लपट देती संकेत
अपने भविष्य को
पूरी शक्ति से अपने भीतर खींचे...
अपने वर्तमान को
अपनी क्षमता अनुसार रोक कर रखें...
अपने भूतकाल को
पूरी ताकत से बाहर निकाल दें.....
यही है सर्वश्रेष्ठ जीवन योग...
पूरी शक्ति से अपने भीतर खींचे...
अपने वर्तमान को
अपनी क्षमता अनुसार रोक कर रखें...
अपने भूतकाल को
पूरी ताकत से बाहर निकाल दें.....
यही है सर्वश्रेष्ठ जीवन योग...
-सदगुरुदेव निखिल वाणी
मान्यता है कि होलिका दहन के समय जलती अग्नि की उठती लौ से अनेक प्रकार के संकेत मिलते हैं। पूरब की ओर लौ उठना कल्याणकारी होता है। दक्षिण की ओर पशु पीड़ा, पश्चिम की ओर सामान्य और उत्तर की ओर लौ उठने से बारिश होने की संभावना रहती है।
भद्रा काल में होती साधना
तांत्रिक मंत्र सिद्धि के लिए होलिका दहन से पूर्व अर्थात भद्रा काल को सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं। यद्यपि पूर्णिमा को प्रात: से मध्य रात्रि तक तात्रिक तंत्र-मंत्र सिद्ध करने का अनुष्ठान करते हैं। किंतु अंतिम तांत्रिक कृत्य रात्रि 12 बजे ही किया जाता है। मंत्र सिद्ध कर तांत्रिक अपना और जातकों का कल्याण करते हैं। मां तारा के साधक ओम नारायण उपाध्याय का कहना है कि फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि तंत्र साधना के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूरे दिन पूजा, पाठ, हवन आदि करते हैं। पीड़ितों की माग पर टोटके भी किए जाते हैं।
होली पर आम लोग जब मस्ती व उमंग में डूबे होते हैं, तब तांत्रिक फाल्गुन पूर्णिमा को मंत्र सिद्ध करने के अनुष्ठान में जुटे रहते हैं। दरअसल, कार्तिक माह की अमावस्या को होने वाली दीपावली के बाद होली ही तांत्रिकों के लिए दूसरी महानिशा होती है, जब वे मंत्र सिद्ध कर सकते हैं। इसीलिए होलिका दहन के बाद लोग जब होली के हुड़दंग में डूबने की तैयारी कर रहे होते हैं, तब तांत्रिक किसी गुमनाम सुनसान जगह पर तंत्र-मंत्र सिद्ध करने का अनुष्ठान करते हैं। भले ही इसे अंधविश्वास माना जाए, लेकिन दीपावली की तरह होली पर टोना-टोटका जगाने की परंपरा आज भी जिंदा है।
इस तरह बचें टोटकों से
- उतारे हुए टोटके का प्रभाव खुले सिर पर जल्दी होता है, अत: सिर को टोपी आदि से ढंके रखें।
- टोने-टोटके में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग भी किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें।
- होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में काले तिल बाधकर रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा, तो वह भी खत्म हो जाएगा।
अधिक जानकारी हेतु सपर्क करे....Ref : D.Jagran,
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श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्
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