Wednesday, 9 March 2022

कोरोना से ठीक होने के बाद होने वाली समस्याएं और उनसे बचाव के उपाय

कोरोना से ठीक होने के बाद होने वाली समस्याएं और उनसे बचाव के उपाय

अभी भी पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी तरह उबर नहीं पाया है. कुछ महीनों के अंतराल पर वायरस का कोई न कोई नया वैरिएंट सामने आ रहा है और लोग उसकी चपेट में आ रहे हैं. जहाँ कुछ महीने पहले तक डेल्टा वैरिएंट को काफी खतरनाक माना जा रहा था वहीँ अब हर जगह ‘ओमिक्रोन’ वैरिएंट की चर्चा है. आंकड़ों के अनुसार कोविड से रिकवर होने वाले लोगों की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है.

Post Covid Symptoms in Hindi

कोरोना महामारी से उबरने के बाद भी कई लोगों को बहुत से अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ लोग कई दिनों तक खांसी से परेशान रह रहे हैं वहीँ अधिकांश लोगों के बाल तेजी से झड़ने लग रहे हैं. इसके अलावा भी कई अन्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं. इस लेख में हम आपको कोविड से ठीक होने के बाद होने वाली समस्याओं और उनसे बचने के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में बता रहे हैं :

Contents

कोविड से रिकवर होने के बाद होने वाले साइड इफ़ेक्ट (Side Effects after Covid Recovery in Hindi)

कोविड से रिकवर होने के बाद भी कई लोगों की शिकायतें आ रही हैं कि उनके बाल बहुत झड रहे हैं या शरीर की कमजोरी कई हफ़्तों तक ठीक नहीं हो रही है. वहीँ डायबिटीज के मरीजों में शुगर का लेवल अनियंत्रित होना या स्ट्रेस बढ़ना भी इसका आम साइड इफ़ेक्ट देखा गया है. ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप अपने खानपान और स्वास्थ्य का ध्यान रखें एवं समय-समय पर ज़रूरी जांच करवाते रहें.

अगर आप कोविड से ठीक होने के बाद अब इन समस्याओं से परेशान हैं तो इस लेख में बताए गए घरेलु नुस्खों को आजमाएं. इन घरेलु उपचारों की मदद से शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है और इन समस्याओं से जल्दी राहत मिलती है.

लंबे समय तक खाँसी की समस्या बने रहना (Persistent cough for a long time)

कोविड संक्रमित होने पर खांसी आना इस संक्रमण का मुख्य लक्षण बताया गया है, लेकिन जब लोग इस बीमारी से ठीक हो जा रहे हैं तब भी कुछ लोगों की खांसी कई हफ़्तों तक ठीक नहीं हो रही है. अगर आप भी खांसी से परेशान हैं तो नीचे बताए गए घरेलु उपचार अपना सकते हैं :

Cough

खांसी ठीक करने के घरेलू उपाय (Home remedies for Cough in Hindi)

एक गिलास दूध में एक चुटकी हल्दी पाउडर डालकर कुछ देर तक उबालें और बाद में इसे गुनगुना होने पर पिएं. इस गुनगुने दूध का दिन में दो बार सेवन करें.

अगर आपको सूखी खांसी हो रही है तो मुलेठी के चूर्ण का उपयोग करें.

शरीर में कमजोरी या थकावट (Weakness or Tiredness)

कोरोना वायरस, शरीर को बहुत हद तक अंदर से कमजोर कर देता है. संक्रमण के दौरान तो कमजोरी इतनी बढ़ जाती है कि मरीज को चलने फिरने में कठिनाई होने लगती है. संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कई लोग काफी दिनों तक तेज थकान या कमजोरी महसूस करते हैं. आइए जानते हैं कि इससे कैसे निजात पाएं :

Body Weakness

कमजोरी दूर करने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Weakness in Hindi)

अगर आप कोविड संक्रमण के बाद शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो गए हैं तो इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपनी डाइट में पौष्टिक चीजों का सेवन बढ़ा दें. पौष्टिक आहार जैसे कि फल, हरी सब्जियां आदि शरीर को पर्याप्त मात्रा में उर्जा देती हैं. इसके साथ ही सुबह शाम एक-एक चम्मच च्वयनप्राश का सेवन करें.

बालों का तेजी से झड़ना (Post Covid Hair Fall)

कोरोना से लड़कर ठीक होने के बाद एक समस्या जो अधिकांश लोगों में देखने को मिल रही है वो है बालों का बहुत तेजी से गिरना. खासतौर पर महिलाएं बाल झड़ने की इस समस्या से बहुत ज्यादा चिंतित हैं. कुछ जगहों पर ऐसा भी पाया गया है कि कोविड वैक्सीन लगवाने के कुछ हफ़्तों बाद अचानक से बाल ज्यादा गिरने लग रहे हैं. अगर आप इस समस्या से जूझ रहें हैं तो नीचे बताए गए घरेलू उपाय अपनाएं साथ ही अगर कुछ दिनों में आराम ना मिले तो डॉक्टर से संपर्क करें.

Home remedies for Hairfall

बालों को झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय (Home remedies to control Hair fall in Hindi)

  • बालों के झड़ने की समस्या से निजात पाने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार ले साथ ही खाने में हरी सब्जी और फलों का उपयोग बढ़ा दें.
  • ऐसे समय में शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिलना ज़रूरी होता है इसलिए अपनी डाइट में दालों का सेवन बढ़ा दें.
  • आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार आंवला का सेवन बालों के लिए बहुत ही उपयोगी होता है. इसके लिए आप दिन में एक बार आंवले का जूस पिएं और अगर आपको जूस का स्वाद अच्छा नहीं लग रहा है तो आप आंवले के मुरब्बे का सेवन कर सकते हैं.

शुगर लेवल अनियंत्रित होना (Uncontrolled Diabetes)

कोरोना के समय सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को हुई जो पहले से डायबिटीज के मरीज थे क्योंकि उनका शुगर लेवल वायरस के संक्रमण के प्रभाव के कारण अनियंत्रित होने लगा. शुगर लेवल अनियंत्रित होने की यह समस्या कोविड से रिकवर होने के बाद भी कई लोगों में देखी गई. आइए जानते हैं डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए आप क्या करें.

Diabetes

डायबिटीज को नियंत्रित करने के घरेलू उपाय (Home remedies for Uncontrolled Diabetes in Hindi)

अगर आप कोविड से रिकवर हो चुके हैं और अभी भी आपका शुगर लेवल अनियंत्रित रहता है तो सबसे ज़रूरी है कि आप अपने खानपान और जीवनशैली में सुधार लाएं. रोजाना सुबह शाम नियमित रूप से व्यायाम करें और भरपूर नींद लें. इन उपायों के अलावा नियमित रूप से अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें और उनकी सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें.

तनाव या डिप्रेशन की समस्या :

कोविड का सबसे बुरा असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है. कोविड से रिकवर हुए ऐसे कई लोगों में यह देखने को मिला है कि वे स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों से घिर चुके हैं. ऐसी अवस्था में आपको समय समय पर जाकर मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए और उनके अनुसार अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने चाहिए. आइए कुछ आयुर्वेदिक उपायों के बारे में भी जानते हैं :

depression

तनाव या डिप्रेशन से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय :

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, अश्वगंधा का सेवन मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) को दूर करने में मदद करता है. इसलिए आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनुसार अश्वगंधा का सीमित मात्रा में सेवन करें.

नियमित रूप से योग और ध्यान करने से भी स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसे मानसिक रोगों को कम किया जा सकता है. रोजाना सुबह और शाम को कम से अकम आधे घंटे ध्यान और योग करें.

ठीक से नींद ना आने की समस्या :

कोविड के साइड इफ़ेक्ट के रूप में कई लोगों को नींद से जुड़ी समस्याएं भी हो रही हैं. पहले की तुलना में कोविड से रिकवर होने के बाद अब उन्हें भरपूर नींद लेने में कठिनाई हो रही है. अगर आप भी नींद से जुड़ी समस्या या अनिद्रा से परेशान हैं तो इन उपायों को आजमाएं.

symptoms of insomnia

अनिद्रा या नींद से जुड़ी समस्या दूर करने के घरेलू उपाय :

  • अगर रात में आपको ठीक से नींद नहीं आ रही है तो इसके लिए रात में सोने से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश करें.
  • रात में सोने से पहले नाक में अणु तेल (आयुर्वेदिक तेल) की कुछ बूंदें डालने से भी अच्छी नींद आती है.

अक्सर मौसमी बीमारियाँ होना :

यह सच है कि मजबूत इम्यूनिटी के कारण ही हम इस वायरस से लड़ने में कामयाब हुए लेकिन फिर भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है. कमजोर इम्यूनिटी होने पर ऐसा देखा गया है कि कोविड से रिकवर होने के बाद भी लोग बार-बार समी बीमारियों जैसे कि सर्दी-जुकाम, वायरल आदि की चपेट में आ रहे हैं. आइए जानते हैं कि मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए क्या करें :

cold and cough

मौसमी बीमारियों से निपटने के घरेलू उपाय :

  • मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए यह ज़रूरी है कि शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाया जाए. इसके लिए आप रोजाना सुबह एक चम्मच च्वयनप्राश का सेवन करें. यह इम्यूनिटी बढ़ाने में बहुत कारगर है.
  • अपनी डाइट में फलों और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ा दें एवं नियमित रूप से व्यायाम करें.
  • ड्राई फ्रूट्स जैसे कि बादाम, अखरोट, पिस्ता आदि का सीमित मात्रा में सेवन करने से भी इम्यूनिटी बढ़ती है और मौसमी बीमारियों से छुटकारा मिलता है.
आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, स्वामी रामदेव जी के साथी और पतंजलि योगपीठ और दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) के एक संस्थापक स्तंभ है। उन्होंने प्राचीन संतों की आध्यात्मिक परंपरा को ऊँचा किया है। आचार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

कफ दोष क्या है : असंतुलित कफ से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय

कफ दोष क्या है : असंतुलित कफ से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय

आयुर्वेद में बताया गया है कि हर एक इंसान की एक ख़ास प्रकृति होती है। अधिकांश लोगों को अपनी प्रकृति के बारे में कोई अंदाज़ा नहीं होता है जबकि आप अपनी आदतों और स्वभाव के आधार पर बहुत आसानी से अपनी प्रकृति जान सकते हैं। जैसे कि किसी काम को शुरु करने में आप बहुत देरी करते हैं या आप चाल बहुत धीमी और गंभीर है तो यह दर्शाता है कि आप कफ प्रकृति के हैं। इस लेख में हम आपको कफ प्रकृति के लक्षणों, इससे जुड़े रोगों और उपायों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Kapha Dosha

कफ दोष क्या है?

कफ दोष, ‘पृथ्वी’ और ‘जल’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। ‘पृथ्वी’ के कारण कफ दोष में स्थिरता और भारीपन और ‘जल’ के कारण तैलीय और चिकनाई वाले गुण होते हैं। यह दोष शरीर की मजबूती और इम्युनिटी क्षमता बढ़ाने में सहायक है। कफ दोष का शरीर में मुख्य स्थान पेट और छाती हैं।

कफ शरीर को पोषण देने के अलावा बाकी दोनों दोषों (वात और पित्त) को भी नियंत्रित करता है। इसकी कमी होने पर ये दोनों दोष अपने आप ही बढ़ जाते हैं। इसलिए शरीर में कफ का संतुलित अवस्था में रहना बहुत ज़रूरी है।

कफ दोष के प्रकार :

शरीर में अलग स्थानों और कार्यों के आधार पर आयुर्वेद में कफ को पांच भागों में बांटा गया है।

  1. क्लेदक
  2. अवलम्बक
  3. बोधक
  4. तर्पक
  5. श्लेषक

आयुर्वेद में कफ दोष से होने वाले रोगों की संख्या करीब 20 मानी गयी है।

कफ के गुण :

कफ भारी, ठंडा, चिकना, मीठा, स्थिर और चिपचिपा होता है। यही इसके स्वाभाविक गुण हैं। इसके अलावा कफ धीमा और गीला होता है। रंगों की बात करें तो कफ का रंग सफ़ेद और स्वाद मीठा होता है। किसी भी दोष में जो गुण पाए जाते हैं उनका शरीर पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है और उसी से प्रकृति का पता चलता है।

कफ प्रकृति की विशेषताएं :

कफ दोष के गुणों के आधार पर ही कफ प्रकृति के लक्षण नजर आते हैं। हर एक दोष का अपना एक विशिष्ट प्रभाव है। जैसे कि भारीपन के कारण ही कफ प्रकृति वाले लोगों की चाल धीमी होती है। शीतलता गुण के कारण उन्हें भूख, प्यास, गर्मी कम लगती है और पसीना कम निकलता है। कोमलता और चिकनाई के कारण पित्त प्रकृति वाले लोग गोरे और सुन्दर होते हैं। किसी भी काम को शुरू करने में देरी या आलस आना, स्थिरता वाले गुण के कारण होता है।

कफ प्रकृति वाले लोगों का शरीर मांसल और सुडौल होता है। इसके अलावा वीर्य की अधिकता भी कफ प्रकृति वाले लोगों का लक्षण है।

कफ बढ़ने के कारण :

मार्च-अप्रैल के महीने में, सुबह के समय, खाना खाने के बाद और छोटे बच्चों में कफ स्वाभाविक रुप से ही बढ़ा हुआ रहता है। इसलिए इन समयों में विशेष ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा खानपान, आदतों और स्वभाव की वजह से भी कफ असंतुलित हो जाता है। आइये जानते हैं कि शरीर में कफ दोष बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं।

  • मीठे, खट्टे और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन
  • मांस-मछली का अधिक सेवन
  • तिल से बनी चीजें, गन्ना, दूध, नमक का अधिक सेवन
  • फ्रिज का ठंडा पानी पीना
  • आलसी स्वभाव और रोजाना व्यायाम ना करना
  • दूध-दही, घी, तिल-उड़द की खिचड़ी, सिंघाड़ा, नारियल, कद्दू आदि का सेवन

कफ बढ़ जाने के लक्षण :

शरीर में कफ दोष बढ़ जाने पर कुछ ख़ास तरह के लक्षण नजर आने लगते हैं। आइये कुछ प्रमुख लक्षणों के बारे में जानते हैं।

  • हमेशा सुस्ती रहना, ज्यादा नींद आना
  • शरीर में भारीपन
  • मल-मूत्र और पसीने में चिपचिपापन
  • शरीर में गीलापन महसूस होना
  • शरीर में लेप लगा हुआ महसूस होना
  • आंखों और नाक से अधिक गंदगी का स्राव
  • अंगों में ढीलापन
  • सांस की तकलीफ और खांसी
  • डिप्रेशन

कफ को संतुलित करने के उपाय :

इसके लिए सबसे पहले उन कारणों को दूर करना होगा जिनकी वजह से शरीर में कफ बढ़ गया है। कफ को संतुलित करने के लिए आपको अपने खानपान और जीवनशैली में ज़रूरी बदलाव करने होंगे। आइये सबसे पहले खानपान से जुड़े बदलावों के बारे में बात करते हैं।

कफ को संतुलित करने के लिए क्या खाएं :

कफ प्रकृति वाले लोगों को इन चीजों का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद रहता है।

  • बाजरा, मक्का, गेंहूं, किनोवा ब्राउन राइस ,राई आदि अनाजों का सेवन करें।
  • सब्जियों में पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली, हरी सेम, शिमला मिर्च, मटर, आलू, मूली, चुकंदर आदि का सेवन करें।
  • जैतून के तेल और सरसों के तेल का उपयोग करें।
  • छाछ और पनीर का सेवन करें।
  • तीखे और गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
  • सभी तरह की दालों को अच्छे से पकाकर खाएं।
  • नमक का सेवन कम करें।
  • पुराने शहद का उचित मात्रा में सेवन करें।

कफ प्रकृति वाले लोगों को क्या नहीं खाना चाहिए :

  • मैदे और इससे बनी चीजों का सेवन ना करें।
  • एवोकैड़ो, खीरा, टमाटर, शकरकंद के सेवन से परहेज करें।
  • केला, खजूर, अंजीर, आम, तरबूज के सेवन से परहेज करें।

जीवनशैली में बदलाव :

खानपान में बदलाव के साथ साथ कफ को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना भी जरूरी है। आइये जाने हैं बढे हुए कफ दोष को कम करने के लिए क्या करना चाहिए।

  • पाउडर से सूखी मालिश या तेल से शरीर की मसाज करें
  • गुनगुने पानी से नहायें।
  • रोजाना कुछ देर धूप में टहलें।
  • रोजाना व्यायाम करें जैसे कि : दौड़ना, ऊँची व लम्बी कूद, कुश्ती, तेजी से टहलना, तैरना आदि।
  • गर्म कपड़ों का अधिक प्रयोग करें।
  • बहुत अधिक चिंता ना करें।
  • देर रात तक जागें
  • रोजाना की दिनचर्या में बदलाव लायें
  • ज्यादा आराम पसंद जिंदगी ना बिताएं बल्कि कुछ ना कुछ करते रहें।

कफ बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर उल्टी करवाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा तीखे और गर्म प्रभाव वाले औषधियों की मदद से उल्टी कराई जाती है। असल में हमारे शरीर में कफ आमाशय और छाती में सबसे ज्यादा होता है, उल्टी (वमन क्रिया) करवाने से इन अंगों से कफ पूरी तरह बाहर निकल जाता है।

कफ की कमी के लक्षण :

कफ बढ़ जाने से तो समस्याएं होना आम बात है लेकिन क्या आपको पता है कि कफ की कमी से भी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। जी हाँ, यदि शरीर में कफ की मात्रा कम हो जाए तो निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं।

  • शरीर में रूखापन :
  • शरीर में अंदर से जलन महसूस होना
  • फेफड़ों, हड्डियों, ह्रदय और सिर में खालीपन महसूस होना
  • बहुत प्यास लगना
  • कमजोरी महसूस होना और नींद की कमी

कफ की कमी का उपचार :

कफ की कमी होने पर उन चीजों का सेवन करें जो कफ को बढ़ाते हो जैसे कि दूध, चावल। गर्मियों के मौसम में दिन में सोने से भी कफ बढ़ता है इसलिए कफ की कमी होने पर आप दिन में कुछ देर ज़रूर सोएं।

साम और निराम कफ :

पाचक अग्नि कमजोर होने पर हम जो भी खाना खाते हैं उसका कुछ भाग ठीक से पच नहीं पाता है और वह हिस्सा मल के रुप में बाहर निकलने की बजाय शरीर में ही पड़ा रहता है। भोजन के इस अधपके अंश को आयुर्वेद में “आम रस’ या ‘आम दोष’ कहा गया है। यह दोषों के साथ मिलकर कई रोग उत्पन्न करता है।

  • जब कफ ‘आम’ से मिला होता है तो यह अस्वच्छ, तार की तरह आपस में मुड़ा हुआ गले में चिपकने वाला गाढ़ा और बदबूदार होता है। ऐसा कफ डकार को रोकता है और भूख को कम करता है।
  • जबकि निराम कफ झाग वाला जमा हुआ, हल्का और दुर्गंध रहित होता है। निराम कफ गले में नहीं चिपकता है और मुंह को साफ़ रखता है।

अगर आप कफ प्रकृति के हैं और अक्सर कफ के असंतुलित होने से परेशान रहते हैं तो ऊपर बताए गए नियमों का पालन करें। यदि समस्या ठीक ना हो रही हो या गंभीर हो तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें।

आचार्य श्री बालकृष्ण

आचार्य बालकृष्ण, स्वामी रामदेव जी के साथी और पतंजलि योगपीठ और दिव्य योग मंदिर (ट्रस्ट) के एक संस्थापक स्तंभ है। उन्होंने प्राचीन संतों की आध्यात्मिक परंपरा को ऊँचा किया है। आचार्य बालकृष्ण जी एक प्रसिद्ध विद्वान और एक महान गुरु है, जिनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आयुर्वेदिक उपचार और अनुसंधान ने नए आयामों को छूआ है।

पित्त दोष क्या है : असंतुलित पित्त से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय

पित्त दोष क्या है : असंतुलित पित्त से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय

क्या आपके शरीर से भी बहुत तेज दुर्गंध आती है? या आप बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते हैं तो जान लें कि ये सारे लक्षण पित्त प्रकृति के हैं। ऐसे लोग जिनमें पित्त दोष ज्यादा पाया जाता है वे पित्त प्रकृति वाले माने जाते हैं। इस लेख में हम आपको पित्त प्रकृति के गुण, लक्षण और इसे संतुलित करने के उपायों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Pitta Dosha

पित्त दोष क्या है?

पित्त दोष ‘अग्नि’ और ‘जल’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है। शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान, पाचक अग्नि जैसी चीजें पित्त द्वारा ही नियंत्रित होती हैं। पित्त का संतुलित अवस्था में होना अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। शरीर में पेट और छोटी आंत में पित्त प्रमुखता से पाया जाता है।

ऐसे लोग पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कि कब्ज़, अपच, एसिडिटी आदि से पीड़ित रहते हैं। पित्त दोष के असंतुलित होते ही पाचक अग्नि कमजोर पड़ने लगती है और खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं  पाता है। पित्त दोष के कारण उत्साह में कमी होने लगती है साथ ही ह्रदय और फेफड़ों में कफ इकठ्ठा होने लगता है। इस लेख में हम आपको पित्त दोष के लक्षण, प्रकृति, गुण और इसे संतुलित रखने के उपाय बता रहे हैं।

पित्त के प्रकार :

शरीर में इनके निवास स्थानों और अलग कामों के आधार पर पित्त को पांच भांगों में बांटा गया है.

  • पाचक पित्त
  • रज्जक पित्त
  • साधक पित्त
  • आलोचक पित्त
  • भ्राजक पित्त

केवल पित्त के प्रकोप से होने वाले रोगों की संख्या 40 मानी गई है।

पित्त के गुण :

चिकनाई, गर्मी, तरल, अम्ल और कड़वा पित्त के लक्षण हैं। पित्त पाचन और गर्मी पैदा करने वाला व कच्चे मांस जैसी बदबू वाला होता है। निराम दशा में पित्त रस कडवे स्वाद वाला पीले रंग का होता है। जबकि साम दशा में यह स्वाद में खट्टा और रंग में नीला होता है। किसी भी दोष में जो गुण पाए जाते हैं उनका शरीर पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है और उसी से प्रकृति के लक्षणों और विशेषताओं का पता चलता है.

पित्त प्रकृति की विशेषताएं :

पित्त प्रकृति वाले लोगों में कुछ ख़ास तरह की विशेषताओं पाई जाती हैं जिनके आधार पर आसानी से उन्हें पहचाना जा सकता है। अगर शारीरिक विशेषताओं की बात करें तो मध्यम कद का शरीर, मांसपेशियों व हड्डियों में कोमलता, त्वचा का साफ़ रंग और उस पर तिल, मस्से होना पित्त प्रकृति के लक्षण हैं। इसके अलावा बालों का सफ़ेद होना, शरीर के अंगों जैसे कि नाख़ून, आंखें, पैर के तलवे हथेलियों का काला होना भी पित्त प्रकृति की विशेषताएं हैं।

पित्त प्रकृति वाले लोगों के स्वभाव में भी कई विशेषताए होती हैं। बहुत जल्दी गुस्सा हो जाना, याददाश्त कमजोर होना, कठिनाइयों से मुकाबला ना कर पाना व सेक्स की इच्छा में कमी इनके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लोग बहुत नकारात्मक होते हैं और इनमें मानसिक रोग होने की संभावना ज्यादा रहती है।

पित्त बढ़ने के कारण:

जाड़ों के शुरूआती मौसम में और युवावस्था में पित्त के बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है। अगर आप पित्त प्रकृति के हैं तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आखिर किन वजहों से पित्त बढ़ रहा है। आइये कुछ प्रमुख कारणों पर एक नजर डालते हैं।

  • चटपटे, नमकीन, मसालेदार और तीखे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन
  • ज्यादा मेहनत करना, हमेशा मानसिक तनाव और गुस्से में रहना
  • अधिक मात्रा में शराब का सेवन
  • सही समय पर खाना ना खाने से या बिना भूख के ही भोजन करना
  • ज्यादा सेक्स करना
  • तिल का तेल,सरसों, दही, छाछ खट्टा सिरका आदि का अधिक सेवन
  • गोह, मछली, भेड़ व बकरी के मांस का अधिक सेवन

ऊपर बताए गए इन सभी कारणों की वजह से पित्त दोष बढ़ जाता है। पित्त प्रकृति वाले युवाओं को खासतौर पर अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए और इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

पित्त बढ़ जाने के लक्षण :

जब किसी व्यक्ति के शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है तो कई तरह के शारीरिक और मानसिक लक्षण नजर आने लगते हैं। पित्त दोष बढ़ने के कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं।

  • बहुत अधिक थकावट, नींद में कमी
  • शरीर में तेज जलन, गर्मी लगना और ज्यादा पसीना आना
  • त्वचा का रंग पहले की तुलना में गाढ़ा हो जाना
  • अंगों से दुर्गंध आना
  • मुंह, गला आदि का पकना
  • ज्यादा गुस्सा आना
  • बेहोशी और चक्कर आना
  • मुंह का कड़वा और खट्टा स्वाद
  • ठंडी चीजें ज्यादा खाने का मन करना
  • त्वचा, मल-मूत्र, नाखूनों और आंखों का रंग पीला पड़ना

अगर आपमें ऊपर बताए गये लक्षणों में से दो या तीन लक्षण भी नजर आते हैं तो इसका मतलब है कि पित्त दोष बढ़ गया है। ऐसे में नजदीकी चिकित्सक के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं।

पित्त को शांत करने के उपाय :

बढे हुए पित्त को संतुलित करने के लिए सबसे पहले तो उन कारणों से दूर रहिये जिनकी वजह से पित्त दोष बढ़ा हुआ है। खानपान और जीवनशैली में बदलाव के अलावा कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की मदद से भी पित्त को दूर किया जाता है।

विरेचन :

बढे हुए पित्त को शांत करने के लिए विरेचन (पेट साफ़ करने वाली औषधि) सबसे अच्छा उपाय है। वास्तव में शुरुआत में पित्त आमाशय और ग्रहणी (Duodenum) में ही इकठ्ठा रहता है। ये पेट साफ़ करने वाली औषधियां इन अंगों में पहुंचकर वहां जमा पित्त को पूरी तरह से बाहर निकाल देती हैं।

पित्त को संतुलित करने के लिए क्या खाएं :

अपनी डाइट में बदलाव लाकर आसानी से बढे हुए पित्त को शांत किया जा सकता है. आइये जानते हैं कि पित्त के प्रकोप से बचने के लिए किन चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए.

  • घी का सेवन सबसे ज्यादा ज़रुरी है।
  • गोभी, खीरा, गाजर, आलू, शिमला मिर्च और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
  • सभी तरह की दालों का सेवन करें।
  • एलोवेरा जूस, अंकुरित अनाज, सलाद और दलिया का सेवन करें।

और पढ़े: पित्त मे चीकू के फायदे

पित्त प्रकृति वाले लोगों को क्या नहीं खाना चाहिए :

खाने-पीने की कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनके सेवन से पित्त दोष और बढ़ता है। इसलिए पित्त प्रकृति वाले लोगों को इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • मूली, काली मिर्च और कच्चे टमाटर खाने से परहेज करें।
  • तिल के तेल, सरसों के तेल से परहेज करें।
  • काजू, मूंगफली, पिस्ता, अखरोट और बिना छिले हुए बादाम से परहेज करें।
  • संतरे के जूस, टमाटर के जूस, कॉफ़ी और शराब से परहेज करें।

जीवनशैली में बदलाव :

सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि पित्त दोष को कम करने के लिए जीवनशैली में भी कुछ बदलाव लाने ज़रूरी हैं। जैसे कि

  • ठंडे तेलों से शरीर की मसाज करें।
  • तैराकी करें।
  • रोजाना कुछ देर छायें में टहलें, धूप में टहलने से बचें।
  • ठंडे पानी से नियमित स्नान करें।

पित्त की कमी के लक्षण और उपचार :

पित्त में बढ़ोतरी होने पर समस्याएँ होना आम बात है लेकिन क्या आपको पता है कि पित्त की कमी से भी कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं? शरीर में पित्त की कमी होने से शरीर के तापमान में कमी, मुंह की चमक में कमी और ठंड लगने जैसी समस्याएं होती हैं। कमी होने पर पित्त के जो स्वाभाविक गुण हैं वे भी अपना काम ठीक से नहीं करते हैं। ऐसी अवस्था में पित्त बढ़ाने वाले आहारों का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा ऐसे खाद्य पदार्थों और औषधियों का सेवन करना चाहिए जिनमें अग्नि तत्व अधिक हो।

साम और निराम पित्त :

हम जो भी खाना खाते हैं उसका कुछ भाग ठीक से पच नहीं पता है और वह हिस्सा मल के रुप में बाहर निकलने की बजाय शरीर में ही पड़ा रहता है। भोजन के इस अधपके अंश को आयुर्वेद में “आम रस’ या ‘आम दोष’ कहा गया है।

जब पित्त, आम दोष से मिल जाता है तो उसे साम पित्त कहते हैं। साम पित्त दुर्गन्धयुक्त खट्टा, स्थिर, भारी और हरे या काले रंग का होता है। साम पित्त होने पर खट्टी डकारें आती हैं और इससे छाती व गले में जलन होती है। इससे आराम पाने के लिए कड़वे स्वाद वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

जब पित्त, आम दोष से नहीं मिलता है तो उसे निराम पित्त कहते हैं। निराम पित्त बहुत ही गर्म, तीखा, कडवे स्वाद वाला, लाल पीले रंग का होता है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है। इससे आराम पाने के लिए मीठे और कसैले पदार्थों का सेवन करें।

पित्त प्रकृति के लोगों को पित्त को बढ़ने से रोकने के लिए ऊपर बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। यदि समस्या ठीक ना हो रही हो या गंभीर हो तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें।

आचार्य श्री बालकृष्ण


वात दोष के लक्षण एवं उपाय

वात दोष क्या है : असंतुलित वात से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय

आपने अपने आस पास ऐसे कई लोगों को देखा होगा जो ज़रूरत से ज्यादा बोलते हैं, हमेशा वे बहुत तेजी में रहते हैं या फिर बहुत जल्दी कोई निर्णय ले लेते हैं। इसी तरह कुछ लोग बैठे हुए भी पैर हिलाते रहते हैं। दरअसल ये सारे लक्षण वात प्रकृति वाले लोगों के हैं। अधिकांश वात प्रकृति वाले लोग आपको ऐसे ही करते नजर आयेंगे। आयुर्वेद में गुणों और लक्षणों के आधार पर प्रकृति का निर्धारण किया गया है। आप अपनी आदतों या लक्षणों को देखकर अपनी प्रकृति का अंदाज़ा लगा सकते हैं। इस लेख में हम आपको वात प्रकृति के गुण, लक्षण और इसे संतुलित रखने के उपाय के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

Pitta Dosha

Contents

वात दोष क्या है

वात दोष “वायु” और “आकाश” इन दो तत्वों से मिलकर बना है। वात या वायु दोष को तीनों दोषों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे शरीर में गति से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया वात के कारण ही संभव है। चरक संहिता में वायु को ही पाचक अग्नि बढ़ाने वाला, सभी इन्द्रियों का प्रेरक और उत्साह का केंद्र माना गया है। वात का मुख्य स्थान पेट और आंत में है।

वात में योगवाहिता या जोड़ने का एक ख़ास गुण होता है। इसका मतलब है कि यह अन्य दोषों के साथ मिलकर उनके गुणों को भी धारण कर लेता है। जैसे कि जब यह पित्त दोष के साथ मिलता है तो इसमें दाह, गर्मी वाले गुण आ जाते हैं और जब कफ के साथ मिलता है तो इसमें शीतलता और गीलेपन जैसे गुण आ जाते हैं।

वात के प्रकार

शरीर में इनके निवास स्थानों और अलग कामों के आधार पर वात को पांच भांगों में बांटा गया है।

  1. प्राण
  2. उदान
  3. समान
  4. व्यान
  5. अपान

आयुर्वेद के अनुसार सिर्फ वात के प्रकोप से होने वाले रोगों की संख्या ही 80 के करीब है।

वात के गुण

रूखापन, शीतलता, लघु, सूक्ष्म, चंचलता, चिपचिपाहट से रहित और खुरदुरापन वात के गुण हैं। रूखापन वात का स्वाभाविक गुण है। जब वात संतुलित अवस्था में रहता है तो आप इसके गुणों को महसूस नहीं कर सकते हैं। लेकिन वात के बढ़ने या असंतुलित होते ही आपको इन गुणों के लक्षण नजर आने लगेंगे।

वात प्रकृति की विशेषताएं

आयुर्वेद की दृष्टि से किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य और रोगों के इलाज में उसकी प्रकृति का विशेष योगदान रहता है। इसी प्रकृति के आधार पर ही रोगी को उसके अनुकूल खानपान और औषधि की सलाह दी जाती है।

वात दोष के गुणों के आधार पर ही वात प्रकृति के लक्षण नजर आते हैं. जैस कि रूखापन गुण होने के कारण भारी आवाज, नींद में कमी, दुबलापन और त्वचा में रूखापन जैसे लक्षण होते हैं. शीतलता गुण के कारण ठंडी चीजों को सहन ना कर पाना, जाड़ों में होने वाले रोगों की चपेट में जल्दी आना, शरीर कांपना जैसे लक्षण होते हैं. शरीर में हल्कापन, तेज चलने में लड़खड़ाने जैसे लक्षण लघुता गुण के कारण होते हैं.

इसी तरह सिर के बालों, नाखूनों, दांत, मुंह और हाथों पैरों में रूखापन भी वात प्रकृति वाले लोगों के लक्षण हैं. स्वभाव की बात की जाए तो वात प्रकृति वाले लोग बहुत जल्दी कोई निर्णय लेते हैं. बहुत जल्दी गुस्सा होना या चिढ़ जाना और बातों को जल्दी समझकर फिर भूल जाना भी पित्त प्रकृति वाले लोगों के स्वभाव में होता है.

वात बढ़ने के कारण

जब आयुर्वेदिक चिकित्सक आपको बताते हैं कि आपका वात बढ़ा हुआ है तो आप समझ नहीं पाते कि आखिर ऐसा क्यों हुआ है? दरअसल हमारे खानपान, स्वभाव और आदतों की वजह से वात बिगड़ जाता है। वात के बढ़ने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  • मल-मूत्र या छींक को रोककर रखना
  • खाए हुए भोजन के पचने से पहले ही कुछ और खा लेना और अधिक मात्रा में खाना
  • रात को देर तक जागना, तेज बोलना
  • अपनी क्षमता से ज्यादा मेहनत करना
  • सफ़र के दौरान गाड़ी में तेज झटके लगना
  • तीखी और कडवी चीजों का अधिक सेवन
  • बहुत ज्यादा ड्राई फ्रूट्स खाना
  • हमेशा चिंता में या मानसिक परेशानी में रहना
  • ज्यादा सेक्स करना
  • ज्यादा ठंडी चीजें खाना
  • व्रत रखना

ऊपर बताए गये इन सभी कारणों की वजह से वात दोष बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में और बूढ़े लोगों में तो इन कारणों के बिना भी वात बढ़ जाता है।

वात बढ़ जाने के लक्षण

वात बढ़ जाने पर शरीर में तमाम तरह के लक्षण नजर आते हैं। आइये उनमें से कुछ प्रमुख लक्षणों पर एक नजर डालते हैं।

  • अंगों में रूखापन और जकड़न
  • सुई के चुभने जैसा दर्द
  • हड्डियों के जोड़ों में ढीलापन
  • हड्डियों का खिसकना और टूटना
  • अंगों में कमजोरी महसूस होना एवं अंगों में कंपकपी
  • अंगों का ठंडा और सुन्न होना
  • कब्ज़
  • नाख़ून, दांतों और त्वचा का फीका पड़ना
  • मुंह का स्वाद कडवा होना

अगर आपमें ऊपर बताए गये लक्षणों में से 2-3 या उससे ज्यादा लक्षण नजर आते हैं तो यह दर्शाता है कि आपके शरीर में वात दोष बढ़ गया है। ऐसे में नजदीकी चिकित्सक के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं।

वात को संतुलित करने के उपाय

वात को शांत या संतुलित करने के लिए आपको अपने खानपान और जीवनशैली में बदलाव लाने होंगे। आपको उन कारणों को दूर करना होगा जिनकी वजह से वात बढ़ रहा है। वात प्रकृति वाले लोगों को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गलत खानपान से तुरंत वात बढ़ जाता है. खानपान में किये गए बदलाव जल्दी असर दिखाते हैं।

वात को संतुलित करने के लिए क्या खाएं

  • घी, तेल और फैट वाली चीजों का सेवन करें।
  • गेंहूं, तिल, अदरक, लहसुन और गुड़ से बनी चीजों का सेवन करें।
  • नमकीन छाछ, मक्खन, ताजा पनीर, उबला हुआ गाय के दूध का सेवन करें।
  • घी में  तले हुए सूखे मेवे खाएं या फिर बादाम,कद्दू के बीज, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीजों को पानी में भिगोकर खाएं।
  • खीरा, गाजर, चुकंदर, पालक, शकरकंद आदि सब्जियों का नियमित सेवन करें।
  • मूंग दाल, राजमा, सोया दूध का सेवन करें।

वात प्रकृति वाले लोगों को क्या नहीं खाना चाहिए

अगर आप वात प्रकृति के हैं तो निम्नलिखित चीजों के सेवन से परहेज करें।

  • साबुत अनाज जैसे कि बाजरा, जौ, मक्का, ब्राउन राइस आदि के सेवन से परहेज करें।
  • किसी भी तरह की गोभी जैसे कि पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली आदि से परहेज करें।
  • जाड़ों के दिनों में ठंडे पेय पदार्थों जैसे कि कोल्ड कॉफ़ी, ब्लैक टी, ग्रीन टी, फलों के जूस आदि ना पियें।
  • नाशपाती, कच्चे केले आदि का सेवन ना करें।

जीवनशैली में बदलाव

जिन लोगों का वात अक्सर असंतुलित रहता है उन्हें अपने जीवनशैली में ये बदलाव लाने चाहिए।

  • एक निश्चित दिनचर्या बनाएं और उसका पालन करें।
  • रोजाना कुछ देर धूप में टहलें और आराम भी करें।
  • किसी शांत जगह पर जाकर रोजाना ध्यान करें।
  • गर्म पानी से और वात को कम करने वाली औषधियों के काढ़े से नहायें। औषधियों से तैयार काढ़े को टब में डालें और उसमें कुछ देर तक बैठे रहें।
  • गुनगुने तेल से नियमित मसाज करें, मसाज के लिए तिल का तेल, बादाम का तेल और जैतून के तेल का इस्तेमाल करें।
  • मजबूती प्रदान करने वाले व्यायामों को रोजाना की दिनचर्या में ज़रूर शामिल करें।
  • वात में कमी के लक्षण और उपचार

    वात में बढ़ोतरी होने की ही तरह वात में कमी होना भी एक समस्या है और इसकी वजह से भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। आइये पहले वात में कमी के प्रमुख लक्षणों के बारे में जानते हैं।

    वात में कमी के लक्षण :

    • बोलने में दिक्कत
    • अंगों में ढीलापन
    • सोचने समझने की क्षमता और याददाश्त में कमी
    • वात के स्वाभाविक कार्यों में कमी
    • पाचन में कमजोरी
    • जी मिचलाना

    उपचार :

    वात की कमी होने पर वात को बढ़ाने वाले आहार का सेवन करना चाहिए। कडवे, तीखे, हल्के एवं ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करें। इनके सेवन से वात जल्दी बढ़ता है। इसके अलावा वात बढ़ने पर जिन चीजों के सेवन की मनाही होती है उन्हें खाने से वात की कमी को दूर किया जा सकता है।

    साम और निराम वात

    हम जो भी खाना खाते हैं उसका कुछ भाग ठीक से पाच नहीं पता है और वह हिस्सा मल के रुप में बाहर निकलने की बजाय शरीर में ही पड़ा रहता है। भोजन के इस अधपके अंश को आयुर्वेद में “आम रस’ या ‘आम दोष’ कहा गया है।

    जब वात शरीर में आम रस के साथ मिल जाता है तो उसे साम वात कहते हैं। साम वात होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं।

    • मल-मूत्र और गैस बाहर निकालने में दिक्कत
    • पाचन शक्ति में कमी
    • हमेशा सुस्ती या आलस महसूस होना
    • आंत में गुडगुडाहट की आवाज
    • कमर दर्द

    यदि साम वात का इलाज ठीक समय पर नहीं किया गया तो आगे चलकर यह पूरे शरीर में फ़ैल जाता है और कई बीमारियों होने लगती हैं।

    जब वात, आम रस युक्त नहीं होता है तो यह निराम वात कहलाता है। निराम वात के प्रमुख लक्षण त्वचा में रूखापन, मुंह जीभ का सूखना आदि है. इसके लिए तैलीय खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करें।

    अगर आप वात प्रकृति के हैं और अक्सर वात के असंतुलित होने से परेशान रहते हैं तो ऊपर बताए गए नियमों का पालन करें। यदि समस्या ठीक ना हो रही हो या गंभीर हो तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें।

    -आचार्य श्री बालकृष्ण

Thursday, 10 February 2022

महानंदा नवमी

महानंदा नवमी :- गुप्त नवरात्रि में बेहद ख़ास होता है यह दिन, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत कथा

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को महानंदा नवमी के रूप में मनाया जाता है। माघ मास की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है और इस नवरात्रि की नवमी तिथि को महानंदा नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन धन की देवी की पूजा का विधान बताया गया है।

माना जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में आर्थिक संकट से जूझ रहा हो या कर्ज और ऋण की परेशानी आपके जीवन में निरंतर बनी हुई हो तो उससे राहत पाने के लिए इस दिन मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा और उपवास करना चाहिए। ऐसा करने से आपको अपनी आर्थिक समस्याओं से राहत अवश्य मिलेगी। इसके अलावा महानंदी नवमी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और धन में वृद्धि होती है।

महानंदा नवमी मुहूर्त
10-फरवरी-2022
09फरवरी, 2022 को सुबह 08:31 बजे शुरू होगी
10 फरवरी, 2022 को सुबह 11:08 बजे समाप्त होगी

जानकारी: नवमी तिथि 9 फरवरी से शुरू होगी लेकिन नवमी को पहला सूर्योदय 10 फरवरी को होगा इसलिए हम 10 फरवरी को नवमी मनाएंगे लेकिन कभी-कभी क्षेत्रीय मान्यताओं और पंचांगों के अनुसार ये चीजें बदल भी जाती हैं।

महानंदा नवमी के दिन ध्यान रखने योग्य बातें
• इस दिन ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर सबसे पहले अपने पूरे घर को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसके बाद घर में बचे हुए कूड़े को सूप में भर कर फेंक दें। कहा जाता है ऐसा करने से घर से अलक्ष्मी का विसर्जन होता है।
• इसके बाद ब्रह्मा मुहूर्त में स्नान करें। वैसे तो इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि यदि यह मुमकिन ना हो तो आप घर के पानी में ही कुछ बूंद गंगाजल की डाल कर उससे स्नान कर लें। 
• पूजा के लिए मां लक्ष्मी की मूर्ति को एक चौकी पर स्थापित करें और उन्हें अक्षत, धूप, अगरबत्ती, और भोग आदि अर्पित करें।
• फिर दीप जलाकर महालक्ष्मी के मंत्र का कम से कम 03 माला जाप करें। 

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।

महानंदा नवमी से संबंधित पौराणिक कथा

इस दिन से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार बताया जाता है कि, एक साहूकार की बेटी एक शहर में रहती थी। वह स्वभाव से बेहद ही धार्मिक थी। वह प्रतिदिन पीपल के पेड़ की पूजा करती थी और पीपल के पेड़ में मां लक्ष्मी का वास होता था। धीरे-धीरे साहूकार की पुत्री और माता लक्ष्मी की दोस्ती हो गयी।
एक दिन मां लक्ष्मी साहूकार की बेटी को अपने घर ले गईं और उसे बहुत सम्मान दिया। उसे बहुत कुछ खिलाया पिलाया और अंत में उसे उपहार देकर विदा करने लगी। विदा करते समय मां लक्ष्मी ने साहूकार की बेटी से कहा कि, ‘तुम मुझे अपने घर कब बुला रही हो’? इस पर साहूकार की बेटी उदास हो गई और सोचने लगी कि आखिर मैं कैसे देवी मां का स्वागत कर पाऊंगी?
हालांकि साहूकार की बेटी ने मां लक्ष्मी को अपने घर आने का आमंत्रण दे दिया। घर पहुंचकर साहूकार की बेटी ने सारी बात अपने पिता को बताई। साहूकार की बेटी की बात बाद सुनकर उसके पिता भी चिंतित हो गए। उसी समय एक कौवे ने एक हीरे का हार साहूकार के घर में गिरा कर चला गया। इस हार को बेचकर साहूकार की बेटी ने मां लक्ष्मी के लिए एक सोने की चौकी खरीदी और एक दुशाला खरीदी।
जब माता लक्ष्मी श्री गणेश के साथ साहूकार की बेटी के घर आईं, तो उन्होंने महालक्ष्मी और भगवान गणेश की बहुत सेवा की। साहूकार की पुत्री की सेवा से माता लक्ष्मी और गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।

महानंदा नवमी पर क्या करें-क्या ना करें
• इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर गंगा नदी में स्नान करें। यदि ऐसा मुमकिन नहीं हो तो अपने घर के नहाने के पानी में ही थोड़ा गंगाजल डालकर उससे स्नान करें। ऐसा करने से भी आपके पिछले जन्म के सभी पाप धुल जाएंगे। 
• इस दिन महालक्ष्मी की पूजा करें, कथा करें। ऐसा करना आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होता है और आपको मानसिक शांति भी मिलती है। 
• पूजा स्थल में दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपका भाग्य उज्जवल होगा। 
• इस दिन रात्रि में महालक्ष्मी के लिए जागरण करें। 
• माता रानी को लाल चुनरी या वस्त्र, फल, श्रृंगार सामग्री और हलवा पूरी जैसी वस्तुएं चढ़ाएं। ऐसा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होगी। 
• अपने घर के मुख्य द्वार पर आम का पत्ता लगायें। 
• इस दिन किसी भी तरह के क्रोध और क्रूरता से दूर रहे। 
• शराब या तामसिक भोजन का सेवन ना करें। 
• घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाकर रखें। 
• इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ रहता है।

इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा l Astrotech Lab के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
जय श्री हरि:
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जय मां आदिलक्ष्मी 🙏

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कामाख्या देवी
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वामाचार पूजा में कामख्या योनि स्तोत्र एवं कवच पाठ माता कामख्या देवी की आराधना का अतिसुगम एवं शक्तिशाली पाठ है। सौभाग्य एवं मनोकामना पूर्ति की इच्छा रखने वाले साधक इसका नित्य पाठ करने से कुछ ही समय मे आश्चर्यजनक फल पा सकते है। इसका नित्य यथा सामर्थ्य अधिक से अधिक पाठ करने से फल शीघ्र मिलने की सम्भवना बढ़ती है। इसका पाठ निष्काम भाव से ही करें सकाम भाव से पाठ करने के लिये श्रीविद्या दीक्षित होना आवश्यक है तथा इसके नियम भी कठिन होते है।
साधक पाठ करने से पहले माता का मणिपुर चक्र में नीचे दिए श्लोकों को पढ़ते हुए मानसिक ध्यान करके पाठ आरम्भ कर सकते है पाठ पूर्ण होने के बाद मानसिक रूप से ही पाठ को अपने गुरु को समर्पण कर आसन के आगे जल छोड़कर उसे माथे पर लगाकर प्राणाम करके एक पाठ सिद्ध कुंजिका के बाद देव्यापराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ करें तो माता पाठ की त्रुटियों को क्षमा करके इच्छित फल प्रदान करती है।

मां कामाख्या योनि स्त्रोत 
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ॐभग-रूपा जगन्माता सृष्टि-स्थिति-लयान्विता ।
दशविद्या - स्वरूपात्मा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।१।।

कोण-त्रय-युता देवि स्तुति-निन्दा-विवर्जिता ।
जगदानन्द-सम्भूता योनिर्मां पातु सर्वदा ।।२।।

कात्र्रिकी - कुन्तलं रूपं योन्युपरि सुशोभितम् ।
भुक्ति-मुक्ति-प्रदा योनि: योनिर्मां पातु सर्वदा ।।३।।

वीर्यरूपा शैलपुत्री मध्यस्थाने विराजिता ।
ब्रह्म-विष्णु-शिव श्रेष्ठा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।४।।

योनिमध्ये महाकाली छिद्ररूपा सुशोभना ।
सुखदा मदनागारा योनिर्मां पातु सर्वदा ।।५।।

काल्यादि-योगिनी-देवी योनिकोणेषु संस्थिता ।
मनोहरा दुःख लभ्या योनिर्मां पातु सर्वदा ।।६।।

सदा शिवो मेरु-रूपो योनिमध्ये वसेत् सदा ।
वैवल्यदा काममुक्ता योनिर्मां पातु सर्वदा ।।७।।

सर्व-देव स्तुता योनि सर्व-देव-प्रपूजिता ।
सर्व-प्रसवकत्र्री त्वं योनिर्मां पातु सर्वदा ।।८।।

सर्व-तीर्थ-मयी योनि: सर्व-पाप प्रणाशिनी ।
सर्वगेहे स्थिता योनि: योनिर्मां पातु सर्वदा ।।९।।

मुक्तिदा धनदा देवी सुखदा कीर्तिदा तथा ।
आरोग्यदा वीर-रता पञ्च-तत्व-युता सदा ।।१०।।

योनिस्तोत्रमिदं प्रोत्तं य: पठेत् योनि-सन्निधौ ।
शक्तिरूपा महादेवी तस्य गेहे सदा स्थिता ।।११।।

।। मां कामाख्या देवी कवच।।
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महादेव उवाच

शृणुष्व परमं गुहयं महाभयनिवर्तकम्।कामाख्याया: सुरश्रेष्ठ कवचं सर्व मंगलम्।।यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी डाकिनीगणा:।राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिका:।।क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदा:।दूरादपि पलायन्ते कवचस्य प्रसादत:।।निर्भयो जायते मत्र्यस्तेजस्वी भैरवोयम:।समासक्तमनाश्चापि जपहोमादिकर्मसु।भवेच्च मन्त्रतन्त्राणां निर्वघ्नेन सुसिद्घये।
महादेव जी बोले-सुरश्रेष्ठ! 

अर्थ👉 भगवती कामाख्या का परम गोपनीय महाभय को दूर करने वाला तथा सर्वमंगलदायक वह कवच सुनिये, जिसकी कृपा तथा स्मरण मात्र से सभी योगिनी, डाकिनीगण, विघ्नकारी राक्षसियां तथा बाधा उत्पन्न करने वाले अन्य उपद्रव, भूख, प्यास, निद्रा तथा उत्पन्न विघ्नदायक दूर से ही पलायन कर जाते हैं। इस कवच के प्रभाव से मनुष्य भय रहित, तेजस्वी तथा भैरवतुल्य हो जाता है। जप, होम आदि कर्मों में समासक्त मन वाले भक्त की मंत्र-तंत्रों में सिद्घि निर्विघ्न हो जाती है।।

कवच पाठ आरम्भ
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ओं प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरूपनिवासिनी।आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम्।।नैर्ऋत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी।वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी।। 
कौबेर्यां पातु मे देवी श्रीविद्या बगलामुखी।ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुरसुन्दरी।। 
ऊध्र्वरक्षतु मे विद्या मातंगी पीठवासिनी।सर्वत: पातु मे नित्यं कामाख्या कलिकास्वयम्।। 
ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्वविद्यामयी स्वयम्।शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा भालं श्री भवगेहिनी।। 
त्रिपुरा भ्रूयुगे पातु शर्वाणी पातु नासिकाम।चक्षुषी चण्डिका पातु श्रोत्रे नीलसरस्वती।। 
मुखं सौम्यमुखी पातु ग्रीवां रक्षतु पार्वती।जिव्हां रक्षतु मे देवी जिव्हाललनभीषणा।। 
वाग्देवी वदनं पातु वक्ष: पातु महेश्वरी।बाहू महाभुजा पातु कराङ्गुली: सुरेश्वरी।। 
पृष्ठत: पातु भीमास्या कट्यां देवी दिगम्बरी।उदरं पातु मे नित्यं महाविद्या महोदरी।।
उग्रतारा महादेवी जङ्घोरू परिरक्षतु।गुदं मुष्कं च मेदं च नाभिं च सुरसुंदरी।। 
पादाङ्गुली: सदा पातु भवानी त्रिदशेश्वरी।रक्तमासास्थिमज्जादीनपातु देवी शवासना।। 
।महाभयेषु घोरेषु महाभयनिवारिणी।पातु देवी महामाया कामाख्यापीठवासिनी।। 
भस्माचलगता दिव्यसिंहासनकृताश्रया।पातु श्री कालिकादेवी सर्वोत्पातेषु सर्वदा।। 
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं कवचेनापि वर्जितम्।तत्सर्वं सर्वदा पातु सर्वरक्षण कारिणी।। 
इदं तु परमं गुह्यं कवचं मुनिसत्तम।कामाख्या भयोक्तं ते सर्वरक्षाकरं परम्।। 
अनेन कृत्वा रक्षां तु निर्भय: साधको भवेत।न तं स्पृशेदभयं घोरं मन्त्रसिद्घि विरोधकम्।।
जायते च मन: सिद्घिर्निर्विघ्नेन महामते।इदं यो धारयेत्कण्ठे बाहौ वा कवचं महत्।। 
अव्याहताज्ञ: स भवेत्सर्वविद्याविशारद:।सर्वत्र लभते सौख्यं मंगलं तु दिनेदिने।। 
य: पठेत्प्रयतो भूत्वा कवचं चेदमद्भुतम्।स देव्या: पदवीं याति सत्यं सत्यं न संशय:।। 

मांकामाख्या देवी कवच हिन्दी अर्थ
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कामरूप में निवास करने वाली भगवती तारा पूर्व दिशा में, पोडशी देवी अग्निकोण में तथा स्वयं धूमावती दक्षिण दिशा में रक्षा करें।। नैऋत्यकोण में भैरवी, पश्चिम दिशा में भुवनेश्वरी और वायव्यकोण में भगवती महेश्वरी छिन्नमस्ता निरंतर मेरी रक्षा करें।। उत्तरदिशा में श्रीविद्यादेवी बगलामुखी तथा ईशानकोण में महात्रिपुर सुंदरी सदा मेरी रक्षा करें।। भगवती 

भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में निवास करने वाली मातंगी विद्या ऊध्र्वभाग में और भगवती कालिका कामाख्या स्वयं सर्वत्र मेरी नित्य रक्षा करें।।  ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्व विद्यामयी स्वयं दुर्गा सिर की रक्षा करें और भगवती श्री भवगेहिनी मेरे ललाट की रक्षा करें।।  त्रिपुरा दोनों भौंहों की, शर्वाणी नासिका की, देवी चंडिका आँखों की तथा नीलसरस्वती दोनों कानों की रक्षा करें।।  भगवती सौम्यमुखी मुख की, देवी पार्वती ग्रीवा की और जिव्हाललन भीषणा देवी मेरी जिव्हा की रक्षा करें।।  वाग्देवी वदन की, भगवती महेश्वरी वक्ष: स्थल की, महाभुजा दोनों बाहु की तथा सुरेश्वरी हाथ की, अंगुलियों की रक्षा करें।।  भीमास्या पृष्ठ भाग की, भगवती दिगम्बरी कटि प्रदेश की और महाविद्या महोदरी सर्वदा मेरे उदर की रक्षा करें।। महादेवी उग्रतारा जंघा और ऊरुओं की एवं सुरसुन्दरी गुदा, अण्डकोश, लिंग तथा नाभि की रक्षा करें।।  भवानी त्रिदशेश्वरी सदा पैर की, अंगुलियों की रक्षा करें और देवी शवासना रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा आदि की रक्षा करें।।  भगवती कामाख्या शक्तिपीठ में निवास करने वाली, महाभय का निवारण करने वाली देवी महामाया भयंकर महाभय से रक्षा करें। भस्माचल पर स्थित दिव्य सिंहासन विराजमान रहने वाली श्री कालिका देवी सदा सभी प्रकार के विघ्नों से रक्षा करें।।  जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है, अतएव रक्षा से रहित है उन सबकी रक्षा सर्वदा भगवती सर्वरक्षकारिणी करे।।  मुनिश्रेष्ठ! मेरे द्वारा आप से महामाया सभी प्रकार की रक्षा करने वाला भगवती कामाख्या का जो यह उत्तम कवच है वह अत्यन्त गोपनीय एवं श्रेष्ठ है।।  इस कवच से रहित होकर साधक निर्भय हो जाता है। मन्त्र सिद्घि का विरोध करने वाले भयंकर भय उसका कभी स्पर्श तक नहीं करते हैं।।  महामते! जो व्यक्ति इस महान कवच को कंठ में अथवा बाहु में धारण करता है उसे निर्विघ्न मनोवांछित फल मिलता है।।  वह अमोघ आज्ञावाला होकर सभी विद्याओं में प्रवीण हो जाता है तथा सभी जगह दिनोंदिन मंगल और सुख प्राप्त करता है। जो जितेन्द्रिय व्यक्ति इस अद्भुत कवच का पाठ करता है वह भगवती के दिव्य धाम को जाता है। यह सत्य है, इसमें संशय नहीं है।।
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Saturday, 5 February 2022

मन्त्र शक्ति रहस्य

जय गुरुदेव
भारत पाकिस्तान के बिच में १९७१ में भीषण युद्ध प्रारम्भ हो गया.....पाकिस्तान को अमेरिका और चीन का खुला सपोर्ट था .....रूस भारत के साथ खड़ा था किन्तु उसने हथियार तो दे दिए ...लड़ना तो भारतीय फौज को ही था ...वो भी दोनों मोर्चे पर ...पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) और पच्छिमी पाकिस्तान ...

ऐसे में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने आर्मी चीफ जनरल सेम मनिकसाहा को सदगुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी के पास भेजा....और तब अपने देश की सुरक्षा के लिए सदगुरुदेव ने जो किया उस से एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ...

जी हाँ सदगुरुदेव ने बगलामुखी ब्रह्मास्त्र का वह अचूक वार किया ....कि बांग्लादेश में पाकिस्तान कि फौज का स्तम्भन हो गया ....एक लाख कि फौज घुटनो पर बैठ गयी.....पश्चिम में भी भारत के सेना ने लाहौर ..करांची को तबाह कर दिया....अमेरिका दूर से ही देखता रह गया....और भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए...

यह सब संभव हो सका हमारे प्यारे निखिल सदगुरुदेव कि कृपा से .....क्योकि जननी जन्मभूमिस्चय स्वर्गादपि गरीयसी ......महापुरुष जनम लेंगे ..तुझ जैसा निखिल दुनिया में कहाँ होगा...

विजयोपरांत जनरल सैम मनिकसाहा सदगुरुदेव को आभार प्रकट करने के लिए स्वं जोधपुर पधारे थे........

जय गुरूदेव

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श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्

श्रीदत्तात्रेयवज्रकवचम्           श्रीगणेशाय नमः ।         श्रीदत्तात्रेयाय नमः । ऋषय ऊचुः । कथं सङ्कल्पसिद्धिः स्याद्वेदव्यास क...