Wednesday, 22 December 2021
अतिक्रांत प्रेतसंस्कार विधी
Sunday, 19 December 2021
कर्म फळ
Wednesday, 15 December 2021
बेंबी (नाभी) मध्ये तेल घातल्याने कुठले फायदे होतात ?
Tuesday, 14 December 2021
Bagalamukhi dhyan siddhi
भगवती बगला के अनेक ' ध्यान' मिलते हैं। 'तन्त्रों' में विशेष कार्यों के लिए विशेष प्रकार के 'ध्यानों' का वर्णन हुआ है। यहाँ कुछ ध्यानों का एक संग्रह दिया जा रहा है। आशा है कि बगलोपासकों के लिए यह संग्रह विशेष उपयोगी सिद्ध होगा, वे इसे कण्ठस्थ अर्थात् याद करके विशेष अनुभूतियों को प्राप्त करेंगे।
चतुर्भुजी बगला
सौवर्णासन-संस्थितां त्रि-नयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्,
हेमाभाङ्ग-रुचिं शशाङ्क-मुकुटां स्रक्-चम्पक-स्र्ग -युताम्!
हस्तैर्मुद्गगर - पाश -वज्र-रसनां संविभ्रतीं भूषणै -
व्याेँप्ताङ्गीं बगला-मुखीं त्रि-जगतां संस्तम्भिनीं चिन्तये | |
अर्थात् सुवर्ण के आसन पर स्थित, तीन नेत्रोंवाली, पीताम्बर से उल्लसित, सुवर्ण की भाँति कान्ति- मय अङ्गोवाली, जिनके मणि-मय मुकुट में चन्द्र चमक रहा है, कण्ठ में सुन्दर चम्पा पुष्प की माला शोभित है, जो अपने चार हाथों में- १. गदा, २. पाश, ३. वज्र और ४. शत्रु की जीभ धारण किए हैं, दिव्य आभूषणों से जिनका पूरा शरीर भरा हुआ है-ऐसी तीनों लोकों का स्तम्भन करनेवाली श्रीबगला-मुखी की मैं चिन्ता करता हूँ।
द्वि-भुजी बगला ( पीताम्बरा ध्यान मंत्र ) मध्ये सुधाऽब्धि-मणि-मण्डप-रत्न-वेद्
पीताम्बराऽऽभरण-माल्य-विभूषिता
जिह्वाग्रमादाय करेण देवीम्, वामेन शत्रून् परि-पीडयन्तीम् ।
गदाऽभिघातेन च दक्षिणेन, पीताम्बराढ्यां द्वि-भुजां नमामि ।।२
अर्थात् सुधा-सागर में मणि-निर्मित मण्डप बना हुआ है और उसके मध्य में रत्नों की बनी हुई चौकोर वेदिका में सिंहासन सजा हुआ है, उसके मध्य में पीले रङ्ग के वस्त्र और आभूषण तथा पुष्पों से सजी हुई श्रीभगवती बगला-मुखी को मैं प्रणाम करता हूँ।।१।॥ भगवती पीताम्बरा के दो हाथ हैं ; बॉए से शत्रु की जिह्वा को बाहर खींचकर दाहिने हाथ में धारण किए हुए मुद्र्गर से उसको पीड़ित कर रही हैं ||2||
चतुर्भुजी बगला (मेरु-तन्त्रोक्त) गम्भीरां च मदोन्मत्तां, तप्त-काञ्चन-सन्निभाम् । चतुर्भुजां त्रि-नयनां, कमलासन-संस्थिताम || मुद्-गरं दक्षिणे पाशं, वामे जिह्वां च वज्रकम् ।पीताम्बर-धरां सान्द्र-वृत्त-पीन-पयोधराम् || हेम-कुण्डल-भूषां च, पीत-चन्द्रार्ध-शेखराम् । पीत-भूषण-भूषां च, स्वर्ण-सिंहासन-स्थिताम् ||
अर्थात् साधक गम्भीराकृति, मद से उन्मत्त, तपाए हुए सोने के समान रङ्गवाली, पीताम्बर धारण किए वर्तुलाकार परस्पर मिले हुए पीन स्तनोंवाली, सुवर्ण-कुण्डलों से मण्डित, पीत-शशि-कला-सुशोभित, मस्तका भगवती पीताम्बरा का ध्यान करे, जिनके दाहिने दोनों हाथों में मुद्र्गर और पाश सुशोभित हो रहे हैं तथा वाम करों में वैरि-जिह्ना और वज्र विराज रहे हैं तथा जो पीले रङ्ग के वस्त्राभूषणों से सुशोभित होकर सुवर्ण-सिंहासन में कमलासन पर विराजमान हैं।
चतुर्भुजी बगला (बगला-दशक)
वन्दे स्वर्णाभ-वर्णां मणि-गण-विलसद्धेम- सिंहासनस्थाम् ।
पीतं वासो वसानां वसु - पद - मुकुटोत्तंस- हाराङ्गदाढ्याम् ।।
पाणिभ्यां वैरि-जिह्वामध उपरि-गदां विभ्रतीं तत्पराभ्याम् ।
हस्ताभ्यां पाशमुच्चैरध उदित-वरां वेद-बाहुं भवानीम् ।।
अर्थात् सुवर्ण जैसी वर्णवाली, मणि-जटित सुवर्ण के सिंहासन पर विराजमान और पीले वस्त्र पहने हुई एवं 'वसु-पद' (अष्ट-पद/अष्टापद) सुवर्ण के मुकुट, कण्डल, हार, बाहु-बन्धादि भूषण पहने हुई एवं अपनी दाहिनी दो भुजाओं में नीचे वैरि-जिह्वा और ऊपर गदा लिए हुईं, ऐसे ही बाएँ दोनों हाथों में ऊपर पाश और नीचे वर धारण किए हुईं, चतुर्भुजा भवानी (भगवती) को प्रणाम करता हूँ।
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Tuesday, 30 November 2021
Monday, 29 November 2021
वसंत पंचमी-सरस्वती कृपा प्राप्ती दिन
Monday, 22 November 2021
पिप्पला पिपल शनी महत्ता
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